कोविड-19 एक वैश्विक महामारी है जिससे पूरा संसार पीड़ित हैं इसी असहनीय पीड़ा को देखकर मेरे मन की अंतरंग ने कोरोना से सवाल पूछा...
क्यू रे कोरोना...
क्यू रे कोरोना, तेरी क्या दुश्मनी है।
क्यू तू बेवक्त, बेवजह एक पहेली है।
क्यू तू मौत की मंजर, की सहेली है।
क्यू तू रैयत की, तबस्सुम की विरोधी है।
क्यू तू अमन-चैन, की मुखालिफ है।
क्यू तू और सभी, से मुख्तलिफ है।
क्यू तू कौम, में मायूसी लाई है।
क्यू तू आंधी, काली घटा लाई है।
क्यू तेरा कहर, मृत्यु जहर है।
क्यू तेरा मंजर, छाती पर खंजर है।

बहोत बेहतरीन योगेंद्र जी, आपके लेख हमें बहोत अच्छे लगते हैं, आप ऐसे ही लिखते रहिए
जवाब देंहटाएंबहोत बहोत subhkamnaye
सहृदय धन्यवाद
हटाएंयोगेन्द्र जी, आपके द्वारा रचित हर लेख समय और परिस्थितियों को सुंदर रूप से चित्रित करता है। आप समय की धारा के साथ निरंतर लेखन कार्य करते रहे। शुभकामनाए
जवाब देंहटाएंदिल के दरवाजे से.... धन्यवाद
हटाएंCorona ke vastavik rup se avagat kraya yah kavita dil ko chhu lene wali hai ...lockdown ke kathin paristhiti me likha gya yah lekh prashanshaniy hai ..keep it up
हटाएंThankyou
हटाएंVery nice poetry yogendra ji
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