दिल के दरवाजे से...

BLOG OF YOGENDRA PRASAD

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गुरुवार, 1 जुलाई 2021

जूनून

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लक्ष्य के प्रति अपनी सजगता को हमेशा बनाए रखने के लिए यह छोटी कविता मैंने लिखने की प्रयास की है :– जूनून लक्ष्य की जुनून में जलना सीखो। बनना ...
शुक्रवार, 14 अगस्त 2020

मन

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संशय की दुविधा करें मन को झकझोर। एक तरफ है कुंआ दूसरी तरफ खाई का छोर। मन की चंचलता करें खुद को करे ऊहापोह। यह कठिन है समय कहता कुछ तू सोच। अ...
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शुक्रवार, 3 जुलाई 2020

तू क्यों रुका है

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रुकना प्रकृति की आदत ही नहीं है। अगर प्रकृति रुक गई तो मानो प्रकृति का विकास रुक जायेगा और इस प्रकृति का कोई अस्तित्व नहीं रह जाएगा किंतु ...
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शुक्रवार, 26 जून 2020

समय तु समझ नहीं आती बस चलती जाती है

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समय समय एक अनमोल चीज है जो जो अमीर, गरीब,निष्पाप, पापी सभी के लिए एक बराबर होती है, किसी के लिए कम किसी के लिए ज्यादा नहीं होता फिर भी को...
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सोमवार, 22 जून 2020

लक्ष्य

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एक स्पष्ट लक्ष्य मनुष्य को महानता की ओर ले जाती है लक्ष्य स्पष्ट होने से मनुष्य में साहस आत्मविश्वास का अद्भुत योग होता है अन्यथा बिना लक्...
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गुरुवार, 11 जून 2020

कर्म कर

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कर्म प्रधान इस संसार में आलस्य एक स्वीकार्य सत्य है जिसे नकारा नहीं जा सकता, किन्तु आलस्य बोध को त्याग आगे बढ़ने की प्रेरणा अगर हमें मिले...
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बुधवार, 10 जून 2020

टूट पड़

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जिंदगी एक जंग की मैदान की तरह है, किसी चीज को पाना आसान नहीं है और अगर हमें सफलता पाना है तो पूरे दिलो जान से मेहनत करना पड़ेगा, फिर आकाश स...
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सोमवार, 8 जून 2020

क्यू रे कोरोना तेरी क्या दुश्मनी है

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कोविड-19 एक वैश्विक महामारी है जिससे पूरा संसार पीड़ित हैं इसी असहनीय पीड़ा को देखकर मेरे मन की अंतरंग ने कोरोना  से सवाल पूछा... क्य...
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