जिंदगी एक जंग की मैदान की तरह है, किसी चीज को पाना आसान नहीं है और अगर हमें सफलता पाना है तो पूरे दिलो जान से मेहनत करना पड़ेगा, फिर आकाश से लेकर पाताल तक ऐसा कोई ऐसा नहीं जो हमें सफलता से रोक सके। किसी चीज की जरूरत है तो वह है लगन, बस हमें टूट पड़ना है।
इसी संदर्भ पर यह चंद पंक्तियां मैंने लिखी है।
टूट पड़
अखाड़े के पहलवान सा, टूट पड़।
भूखे शेर की निगाह सा, टूट पड़।
योद्धा की कटार सा, टूट पड़।
वज्र की प्रहार सा, टूट पड़।
रक्त की प्रवाह सा, टूट पड़।
वक्त की प्रवाह सा, टूट पड़।
जवान की जज्बात सा, टूट पड़।
लोहार के औजार सा, टूट पड़।
खुर्शीद की प्रकाश सा, टूट पड़।
ज्वाला की धाक सा, टूट पड़।
रेगिस्तान की प्यास सा, टूट पड़।
धावक की चाल सा, टूट पड़।
चीता की धाव सा, टूट पड़।
आग की धधक सा, टूट पड़।
इसी संदर्भ पर यह चंद पंक्तियां मैंने लिखी है।
टूट पड़

अखाड़े के पहलवान सा, टूट पड़।
भूखे शेर की निगाह सा, टूट पड़।
योद्धा की कटार सा, टूट पड़।
वज्र की प्रहार सा, टूट पड़।
रक्त की प्रवाह सा, टूट पड़।
वक्त की प्रवाह सा, टूट पड़।
जवान की जज्बात सा, टूट पड़।
लोहार के औजार सा, टूट पड़।
खुर्शीद की प्रकाश सा, टूट पड़।
ज्वाला की धाक सा, टूट पड़।
रेगिस्तान की प्यास सा, टूट पड़।
धावक की चाल सा, टूट पड़।
चीता की धाव सा, टूट पड़।
आग की धधक सा, टूट पड़।
दिल के दरवाजे से...❤️
©10june2020 दिल के दरवाजे से...टूट पड़yogendra prasad sahu All Right Reserved.
Very nice motivation poetry
जवाब देंहटाएंThankyou
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