कर्म प्रधान इस संसार में आलस्य एक स्वीकार्य सत्य है जिसे नकारा नहीं जा सकता, किन्तु आलस्य बोध को त्याग आगे बढ़ने की प्रेरणा अगर हमें मिले तो आलस्य का समाधान जरूर होता है।
इसी संदर्भ पर मैंने कुछ पंक्तियां लिखी है।कर्म कर
आलस्य त्याग कर्म कर, भाग्य त्याग प्रयत्न कर।
भूत को त्याग कर, आज पर ध्यान कर।
चिंता को त्याग कर, चीता से आगे चल।
यह जिंदगी है कर्म की, कर्म कर कर्म कर।
निद्रा को त्याग कर, प्रयत्न कर प्रयत्न कर।
भावना की भंवर से निकलकर, प्रयत्न कर।
भय की जंजीर तोड़, मन को प्रबल कर।
यह जिंदगी है कर्म की, कर्म कर कर्म कर।
दृढ़ निश्चय को आत्मसात कर, स्वयं पर विश्वास कर।
वक्त को ध्यान रख, वाणी पर अमल कर।
फल की न बात कर, निरंतरता से प्रयास कर।
यह जिंदगी है कर्म की, कर्म कर कर्म कर।
©11june2020दिल के दरवाजे से...कर्म कर yogendra prasad sahu All right reserved.
यह जिंदगी है कर्म की, कर्म कर कर्म कर।
निद्रा को त्याग कर, प्रयत्न कर प्रयत्न कर।
भावना की भंवर से निकलकर, प्रयत्न कर।
भय की जंजीर तोड़, मन को प्रबल कर।
यह जिंदगी है कर्म की, कर्म कर कर्म कर।
दृढ़ निश्चय को आत्मसात कर, स्वयं पर विश्वास कर।
वक्त को ध्यान रख, वाणी पर अमल कर।
फल की न बात कर, निरंतरता से प्रयास कर।
यह जिंदगी है कर्म की, कर्म कर कर्म कर।
आलस्य त्याग कर्म कर, भाग्य त्याग प्रयत्न कर।
भूत को त्याग कर, आज पर ध्यान कर।
चिंता को त्याग कर, चीता से आगे चल।
यह जिंदगी है कर्म की, कर्म कर कर्म कर।
यह जिंदगी है कर्म की, कर्म कर कर्म कर।
दिल के दरवाजे से...❤️
©11june2020दिल के दरवाजे से...कर्म कर yogendra prasad sahu All right reserved.

Bahot khoob yogendra ji
जवाब देंहटाएंReally motivational 👌
Thankyou
हटाएंबहुत ही शानदार
जवाब देंहटाएंWaah kya bat h ..keep it up👍
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