सोमवार, 22 जून 2020

लक्ष्य

एक स्पष्ट लक्ष्य मनुष्य को महानता की ओर ले जाती है लक्ष्य स्पष्ट होने से मनुष्य में साहस आत्मविश्वास का अद्भुत योग होता है अन्यथा बिना लक्ष्य के मनुष्य का विश्वास धरे के धरे रह जाता है, तो यह लक्ष्य ही हैं जो मनुष्य को अपनी मंजिल की ओर ले जाने के लिए प्रेरित करती हैं।
अगर धावक को रेस लगानी हो और सामने कोहरा हो तो धावक अपनी रणनीति सही से बनाने में असमर्थ होगी क्योंकि उसका लक्ष्य स्पष्ट नहीं है, कहने का तात्पर्य है कि मनुष्य कितना ही दमदार हो, वह धावक कितना भी दमदार हो जब तक उसका लक्ष्य स्पष्ट नहीं उसका आत्मविश्वास, कार्य करने की प्रेरणा उठ नहीं पाती। यह लक्ष्य हमें कार्य करने की प्रेरणा को बढ़ाने में सहायक करती हैं बिना लक्ष्य के मनुष्य उस धावक के समान हैं जिसके सामने कोहरा है, जिसको उसके राह दिखाई नहीं देती अगर दौड़ने का प्रयास भी करती हैं धावक तो उसका आत्मविश्वास उसके साथ नहीं देती अगर उसका आत्मविश्वास साथ भी दे दे तो वह उस लक्ष्य के लिए उपयुक्त समय का अनुमान नहीं लगा पाता। उसी प्रकार मनुष्य भी बिना लक्ष्य के अपनी समय का अनुमान नहीं लगा पाता वह समय उपयोग करने की जगह दुरुपयोग करने लगता है।
मनुष्य का लक्ष्य हमेशा एक कोरे कागज में लिखित होना चाहिए जो हमेशा उसके नयन के सामने होने चाहिए क्योंकि यह लिखित लक्ष्य हमारे लक्ष्य के प्रति सावधान कराती रहेगी।
हर एक मानव का स्पष्ट लक्ष्य होना चाहिए चाहे वह अपनी अध्ययन का हो अपने आर्थिक लाभ का सामाजिक लाभ का हो या फिर कोई साधारण कृषक हो एक समुचित स्पष्ट लक्ष्य कार्य करने की प्रेरणा को बुलंदी देती है। अगर इस दुनिया को देखें तो जितने भी महान व्यक्तियों उसका कोई ना कोई स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित रहता है कोई बड़े से बड़े ऑफिसर हो आईएएस ऑफिसर, आईपीएस ऑफिसर, आईआरएस ऑफिसर, इंजीनियर, डाक्टर, पत्रकार, जज, राजनेता, अभिनेता, अध्यापक सभी का स्पष्ट निर्धारित लक्ष्य होता है अगर अध्यापक का बात करें तो उसका लक्ष्य पूरी तरीके से स्पष्ट व नियोजित होता है की कितने समय में विद्यार्थियों को पूरी पाठ्यक्रम पूर्ण करानी है। पाठ्यक्रम चाहे कितना भी कठिन हो अध्यापक का विश्वास ऊंचा रहता है क्योंकि उसका लक्ष ऊंचा है।
लक्ष्य की बिना मनुष्य टूटा टूटा सा महसूस करते हैं। लक्ष्य के बिना भय डर व कार्य करने की शक्ति में कमी आती है क्योंकि लक्ष्य के बिना हमारा मनोबल कम रहता है मनोबल बढ़ाने का एक तरीका यह लक्ष्य ही हैं। 
जिस प्रकार नदी का एक लक्ष्य है कि समुंदर में मिल जाना है , मेघ का लक्ष्य है बरसना है, मिट्टी का लक्ष्य है उपजाऊ होना है, वृक्ष का लक्ष्य है विकास और फूल- फल है।
अर्थात छिति जल पावक गगन समीरा सभी का स्पष्ट लक्ष्य है, तो मनुष्य का लक्ष्य भी स्पष्ट होना चाहिए तभी लक्ष्य की बात का जिक्र करते हुए महान व्यक्ति बेंजामिन मेष ने कहा है "जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी यह नहीं कि आप लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाए, सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि वहां तक पहुंचने के लिए कोई लक्ष्य ही नहीं था" वही स्वामी विवेकानंद ने कहा है "उठो जागो और तब तक ना रुको जब तक अपनी लक्ष्य की प्राप्ति न कर लो"।

अंत में फिर कोहरे का जिक्र करते हुए कहना चाहूंगा कि इस मानव जिंदगी में लक्ष्य के सामने कोई कोहरा नहीं होना चाहिए क्योंकि सामने कोहरा होने से गाड़ी का इंजन कितना भी सख्त हो आत्मवश्वास और पूर्ण मनोबल के साथ आगे नहीं बढ़ पाती।

लक्ष्य स्पष्ट तो मनोबल ऊंचा।
लक्ष्य स्पष्ट तो आत्मविश्वास ऊंचा।
लक्ष्य स्पष्ट तो प्रेरणा ऊंचा।
लक्ष्य स्पष्ट तो कर्म ऊंचा।


दिल के दरवाजे से...❤️



2 टिप्‍पणियां:

  1. आपका यह प्रयास सराहनीय है। इससे बहुत सारे लोगों को अपने लक्ष्य के प्रति उत्साह और साथ में मनोबल में भी वृद्धि होगी ।

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