शुक्रवार, 26 जून 2020

समय तु समझ नहीं आती बस चलती जाती है

समय

समय एक अनमोल चीज है जो जो अमीर, गरीब,निष्पाप, पापी सभी के लिए एक बराबर होती है, किसी के लिए कम किसी के लिए ज्यादा नहीं होता फिर भी कोई मनुष्य समय को कम बताती, तो किसी की समय कटती नहीं यह है बड़ी चिंतनीय क्यों एक को ज्यादा हैं क्यों एक को कम किंतु सच तो यही है कि यह सब के लिए बराबर हैं।
समय के प्रति मनुष्य के मर्म को समझना बड़ी ही कठिन है। इस अनमोल समय पर मैंने चंद पंक्तियां लिखी है


तु समझ नहीं आती, बस चलती जाती है।
जब तू समझ आती, समय चली जाती है।

मुसीबतों की समय, तू बढ़ जाती है।
सुख में तू स्वत: कम हो जाती है।

यु तो तू है सबको, निश्चल बराबर।
पता नहीं फिर भी, क्यों छल जाती है।

कुछ ही मात्र, तुझको समझ पाए।
बहुतायन तो, तुझको देखते ही जाए।

तेरे जाने के बाद सभी तुझे याद करती है
रहते ही तेरी, कदर न करती है।

तुझे रोका है केवल रावण ने।
हम निष्पाप से क्यों नहीं रुकती।

तु समझ नहीं आती, बस चलती जाती है।
जब तू समझ आती, समय चली जाती है।





दिल के दरवाजे से...❤️











©25june2020दिल के दरवाजे से... समय yogendra prasad sahu All right reserved.









सोमवार, 22 जून 2020

लक्ष्य

एक स्पष्ट लक्ष्य मनुष्य को महानता की ओर ले जाती है लक्ष्य स्पष्ट होने से मनुष्य में साहस आत्मविश्वास का अद्भुत योग होता है अन्यथा बिना लक्ष्य के मनुष्य का विश्वास धरे के धरे रह जाता है, तो यह लक्ष्य ही हैं जो मनुष्य को अपनी मंजिल की ओर ले जाने के लिए प्रेरित करती हैं।
अगर धावक को रेस लगानी हो और सामने कोहरा हो तो धावक अपनी रणनीति सही से बनाने में असमर्थ होगी क्योंकि उसका लक्ष्य स्पष्ट नहीं है, कहने का तात्पर्य है कि मनुष्य कितना ही दमदार हो, वह धावक कितना भी दमदार हो जब तक उसका लक्ष्य स्पष्ट नहीं उसका आत्मविश्वास, कार्य करने की प्रेरणा उठ नहीं पाती। यह लक्ष्य हमें कार्य करने की प्रेरणा को बढ़ाने में सहायक करती हैं बिना लक्ष्य के मनुष्य उस धावक के समान हैं जिसके सामने कोहरा है, जिसको उसके राह दिखाई नहीं देती अगर दौड़ने का प्रयास भी करती हैं धावक तो उसका आत्मविश्वास उसके साथ नहीं देती अगर उसका आत्मविश्वास साथ भी दे दे तो वह उस लक्ष्य के लिए उपयुक्त समय का अनुमान नहीं लगा पाता। उसी प्रकार मनुष्य भी बिना लक्ष्य के अपनी समय का अनुमान नहीं लगा पाता वह समय उपयोग करने की जगह दुरुपयोग करने लगता है।
मनुष्य का लक्ष्य हमेशा एक कोरे कागज में लिखित होना चाहिए जो हमेशा उसके नयन के सामने होने चाहिए क्योंकि यह लिखित लक्ष्य हमारे लक्ष्य के प्रति सावधान कराती रहेगी।
हर एक मानव का स्पष्ट लक्ष्य होना चाहिए चाहे वह अपनी अध्ययन का हो अपने आर्थिक लाभ का सामाजिक लाभ का हो या फिर कोई साधारण कृषक हो एक समुचित स्पष्ट लक्ष्य कार्य करने की प्रेरणा को बुलंदी देती है। अगर इस दुनिया को देखें तो जितने भी महान व्यक्तियों उसका कोई ना कोई स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित रहता है कोई बड़े से बड़े ऑफिसर हो आईएएस ऑफिसर, आईपीएस ऑफिसर, आईआरएस ऑफिसर, इंजीनियर, डाक्टर, पत्रकार, जज, राजनेता, अभिनेता, अध्यापक सभी का स्पष्ट निर्धारित लक्ष्य होता है अगर अध्यापक का बात करें तो उसका लक्ष्य पूरी तरीके से स्पष्ट व नियोजित होता है की कितने समय में विद्यार्थियों को पूरी पाठ्यक्रम पूर्ण करानी है। पाठ्यक्रम चाहे कितना भी कठिन हो अध्यापक का विश्वास ऊंचा रहता है क्योंकि उसका लक्ष ऊंचा है।
लक्ष्य की बिना मनुष्य टूटा टूटा सा महसूस करते हैं। लक्ष्य के बिना भय डर व कार्य करने की शक्ति में कमी आती है क्योंकि लक्ष्य के बिना हमारा मनोबल कम रहता है मनोबल बढ़ाने का एक तरीका यह लक्ष्य ही हैं। 
जिस प्रकार नदी का एक लक्ष्य है कि समुंदर में मिल जाना है , मेघ का लक्ष्य है बरसना है, मिट्टी का लक्ष्य है उपजाऊ होना है, वृक्ष का लक्ष्य है विकास और फूल- फल है।
अर्थात छिति जल पावक गगन समीरा सभी का स्पष्ट लक्ष्य है, तो मनुष्य का लक्ष्य भी स्पष्ट होना चाहिए तभी लक्ष्य की बात का जिक्र करते हुए महान व्यक्ति बेंजामिन मेष ने कहा है "जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी यह नहीं कि आप लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाए, सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि वहां तक पहुंचने के लिए कोई लक्ष्य ही नहीं था" वही स्वामी विवेकानंद ने कहा है "उठो जागो और तब तक ना रुको जब तक अपनी लक्ष्य की प्राप्ति न कर लो"।

अंत में फिर कोहरे का जिक्र करते हुए कहना चाहूंगा कि इस मानव जिंदगी में लक्ष्य के सामने कोई कोहरा नहीं होना चाहिए क्योंकि सामने कोहरा होने से गाड़ी का इंजन कितना भी सख्त हो आत्मवश्वास और पूर्ण मनोबल के साथ आगे नहीं बढ़ पाती।

लक्ष्य स्पष्ट तो मनोबल ऊंचा।
लक्ष्य स्पष्ट तो आत्मविश्वास ऊंचा।
लक्ष्य स्पष्ट तो प्रेरणा ऊंचा।
लक्ष्य स्पष्ट तो कर्म ऊंचा।


दिल के दरवाजे से...❤️



गुरुवार, 11 जून 2020

कर्म कर

कर्म प्रधान इस संसार में आलस्य एक स्वीकार्य सत्य है जिसे नकारा नहीं जा सकता, किन्तु आलस्य बोध को त्याग आगे बढ़ने की प्रेरणा अगर हमें मिले तो आलस्य का समाधान जरूर होता है।
इसी संदर्भ पर मैंने कुछ पंक्तियां लिखी है।

कर्म कर

आलस्य त्याग कर्म कर, भाग्य त्याग प्रयत्न कर।
भूत को त्याग कर, आज पर ध्यान कर।
चिंता को त्याग कर, चीता से आगे चल।
यह जिंदगी है कर्म की, कर्म कर कर्म कर।

निद्रा को त्याग कर, प्रयत्न कर प्रयत्न कर।
भावना की भंवर से निकलकर, प्रयत्न कर।
भय की जंजीर तोड़, मन को प्रबल कर।
यह जिंदगी है कर्म की, कर्म कर कर्म कर।

दृढ़ निश्चय को आत्मसात कर, स्वयं पर विश्वास कर।
वक्त को ध्यान रख, वाणी पर अमल कर।
फल की न बात कर, निरंतरता से प्रयास कर।
यह जिंदगी है कर्म की, कर्म कर कर्म कर।


आलस्य त्याग कर्म कर, भाग्य त्याग प्रयत्न कर।
भूत को त्याग कर, आज पर ध्यान कर।
चिंता को त्याग कर, चीता से आगे चल।
यह जिंदगी है कर्म की, कर्म कर कर्म कर।









दिल के दरवाजे से...❤️





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बुधवार, 10 जून 2020

टूट पड़

जिंदगी एक जंग की मैदान की तरह है, किसी चीज को पाना आसान नहीं है और अगर हमें सफलता पाना है तो पूरे दिलो जान से मेहनत करना पड़ेगा, फिर आकाश से लेकर पाताल तक ऐसा कोई ऐसा नहीं जो हमें सफलता से रोक सके। किसी चीज की जरूरत है तो वह है लगन, बस हमें टूट पड़ना है।

इसी संदर्भ पर यह चंद पंक्तियां मैंने लिखी है
टूट पड़

अखाड़े के पहलवान सा, टूट पड़।
भूखे शेर की निगाह सा, टूट पड़।

योद्धा की कटार सा, टूट पड़।
वज्र की प्रहार सा, टूट पड़।

रक्त की प्रवाह सा, टूट पड़।
वक्त की प्रवाह सा, टूट पड़।

जवान की जज्बात सा,  टूट पड़।
लोहार के औजार सा, टूट पड़।

खुर्शीद की प्रकाश सा, टूट पड़।
ज्वाला की धाक सा, टूट पड़।

रेगिस्तान की प्यास सा, टूट पड़।
धावक की चाल सा, टूट पड़।

चीता की धाव सा, टूट पड़।
आग की धधक सा, टूट पड़।


दिल के दरवाजे से...❤️


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सोमवार, 8 जून 2020

क्यू रे कोरोना तेरी क्या दुश्मनी है

कोविड-19 एक वैश्विक महामारी है जिससे पूरा संसार पीड़ित हैं इसी असहनीय पीड़ा को देखकर मेरे मन की अंतरंग ने कोरोना  से सवाल पूछा...

क्यू रे कोरोना...

क्यू रे कोरोना, तेरी क्या दुश्मनी है।
क्यू तू बेवक्त, बेवजह एक पहेली है।

क्यू तू मौत की मंजर, की सहेली है।
क्यू तू रैयत की, तबस्सुम की विरोधी है।

क्यू तू अमन-चैन, की मुखालिफ है।
क्यू तू और सभी, से मुख्तलिफ है।

क्यू तू कौम, में मायूसी लाई है।
क्यू तू आंधी, काली घटा लाई है।

क्यू तेरा कहर, मृत्यु जहर है।
क्यू तेरा मंजर, छाती पर खंजर है।

क्यू... 💔💔💔.....

क्यू रे कोरोना, तेरी क्या दुश्मनी है।
क्यू तू बेवक्त, बेवजह एक पहेली है।
क्यू... 💔💔💔.....

क्यू रे कोरोना क्यू....💔💔💔
दिल के दरवाजे से...❤️


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टूट पड़

जिंदगी एक जंग की मैदान की तरह है, किसी चीज को पाना आसान नहीं है और अगर हमें सफलता पाना है तो पूरे दिलो जान से मेहनत करना पड़ेगा, फिर आकाश स...