संशय की दुविधा करें मन को झकझोर।
एक तरफ है कुंआ दूसरी तरफ खाई का छोर।
मन की चंचलता करें खुद को करे ऊहापोह।
यह कठिन है समय कहता कुछ तू सोच।
अगर सोचे भी तो क्या सोचे।
एक तरफ है कुंआ दूसरी तरफ खाई का छोर।
मन करे यह करूं मन करे वह करू।
चंचल मन को क्या कहूं जो मुझे चलाने लग गया।
मार के मन को त्याग कर सुविधा मन करे वह कर।
समय नहीं है मन को सवारने की मन मार कर कर।
संशय की दूविधा करें मन को झकझोर।
एक तरफ कुआं हैं और दूसरी ओर खाई का छोर।
❤️दिल के दरवाजे से...❤️
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